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कभी आँसू कभी खुशबू कभी नगमा बनकर हम को हेर शाम मिली हे तैरा चेहरा बन कऱ
मेरी जागी हुई रातो को हे उस की तलाश सो रहा हे जो मैरी आंखो मैं सपना बन कऱ
रात भी आए तो बुझती नही चेहरे की चमक रूह मैं फेल गया हे जो उजाला बन कऱ
धूप मे खो गया हाथ चुर्रा कर वो घर से चला था जो मेरा साया बन कऱ
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