खुश्बू जैसे लोग मिले अफसाने में
एक पुराना खत खोला अंजाने में !
शाम के साये बालिश्तो सें नापे है
चांदने कितनी देर लगादी आने में !
दिल पर दस्तक देने ये कौन आया है
किसकी आहट सुनता हुं विराने में !
जाने किसका झिक्र है अफसाने में
दर्द मझा लेता है जो दोहराने में !
sung by gulam ali