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chale aanaa
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मैं तुम को बहुत आने लगु जब याद, चले आना भूल जाना अपनी कही हर बात, चले आना
जुदाई का वो लम्हा और वो मंज़र ढलते सूरज का याद तुम को जब आने लगे वो शाम, चले आना
भूल जाओ तुम अगर मंज़िल कभी अपनी उतना अपने क़दम फिर मेरी तरफ , चले आना
हद से गुज़र जाए जब मेरा ज़ब्त-ए-घूम और मे पुकारू तुम को बार बार, चले आना
उस के बिन जीने का अब तसव्वुर नहि मेरी मौत का गर तुम को मिले पैग़ाम, चले आना
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