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| Saturday 11 October, 2008 |
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ajab dastaan
ये कैसी अजब दास्तान हो गयी है छुपाते छुपाते बयान हो गयी है ये कैसी अजब दास्तान हो गयी है
ये दिल क़ा धड़कना, ये नज़रों क़ा झुकना जिगर में जलन सी ये साँसों क़ा रूकना खुदा जाने क्या दास्तान हो गयी है छुपाते छुपाते बयान हो गयी है ये कैसी अजब दास्तान हो गयी है
बुझा दो बुझा दो, बुझा दो सितारों की शम्मे बुझा दो छुपा दो छुपा दो, छुपा दो हसीन चाँद को भी छुपा दो यहाँ रौशनी महमां हो गयी है आ आ आ आ, ये कैसी अजब दास्तान हो गयी है
इलाही ये तुउफान है किस बला क़ा की हाथों से छुता है दामन हया क़ा खुदा की क़सम आज दिल कह रहा है की लुट जाउन मैं नाम लेकर वफ़ा क़ा
तमन्ना तड़प कर जवां हो गयी है आ आ आ आ, ये कैसी अजब
फिल्म : रुस्तम सोहराब
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